महिला पत्रकार को मुख्यमंत्री से सवाल करना पड़ा भारी-रो रो कर किया वीडियो पोस्ट

उत्तर प्रदेश भाजपा प्रदेश मुख्यालय लखनऊ में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 25 वर्ष के कार्यकाल 7 अक्टूबर को पूरा होने व 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर सेवा संकल्प अभियान एक महिना 17 अक्टूबर तक कार्यो को जन जन तक लेकर जाने हेतु प्रेस वार्ता बुलाई गई थी,इस प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मुख्य रूप से शामिल हुए थे प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री द्वारा गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए और देश के प्रधानमंत्री रहते हुए सभी विकास कार्यो को बताया गया था प्रेस वार्ता के अंत में एक महिला पत्रकार ने मुख्यमंत्री से सवाल किया।

करीब 20 मिनट चली प्रेस वार्ता में सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष व मुख्यमंत्री बोले न कोई सवाल न कोई जवाब इसी बात को लेकर पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री से पीछे से आवाज देकर कहा मुख्यमंत्री जी सवालों का जवाब तो दे दीजिये बिना किसी सवाल बिना किसी जवाब दिए कैसी प्रेस वार्ता यह प्रेस वार्ता थी या सम्भोदित करने के लिए बुलाया था,बस यही बात भाजपा नेताओ को बुरी लग गई और उसी जगह महिला पत्रकार पर बयान बजी की गई गलियां दी गई घर पर बुलडोजर चलाने की बात कही गई प्रताड़ित किया गया पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव ने बताया कि मुझे धमकियां दी गई बत्तमीजी की गई सोसल मिडिया पर भी बयानबाजी की जा रही है।

पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए बताया मेरे पीछे एल आई यू को लगाया गया है मेरे चैंनल का नाम पूछा जा रहा है मुझे धमकियां दी जा रही है यदि मुझे कुछ होता है तो उसकी जिम्मेदार भाजपा होगी,उन्होंने बताया कि में सवाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किया जाना था,अब पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव का मुख्यमंत्री से सवाल करने का वीडियो वायरल हो रहा है और पत्रकार को धमकियां दी जा रही है,पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव ने बताया मुझे उंडार ग्राउंड होने को कहा जा रहा है,चैंनल ने मुझे रिमूव कर दिया है।

ऐसे में बड़ा सवाल बनता है उन भारतीयों से जो वोट के माध्यम से सरकार को चुनते है कि क्या आम आदमी की बात तो छोडो पत्रकार को सवाल पूछने का भी कोई हक नही रहा माना कि सरकार अपनी मनमानी करती है तो करे लेकिन क्या पत्रकारिक्ता को दबाया जाना ही सरकार चलाने का मुख्य उचेत्य है अगर है तो देश के अन्दर पत्रकारिकता की मन्यता को ही खत्म कर देना चाहिए जनता की और से पूछे गए सवाल का जवाब न देना और उस पर दबंगता से पैस आना लोकतंत्र नही तानाशाही है,पत्रकार जगत अब इस सम्बन्ध में रोष देखने को मिल रहा है।

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