भारत निर्वाचन आयोग इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इण्डिया की बड़ी अपडेट आई है जिसमे बताया जा रहा है कि SIR पूरा कर चुके राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म–6 से माता–पिता की जानकारी देने वाला विकल्प हटाया गया। जिसको लेकर सियासत और तेज़ हो गई है इस बड़ी अपडेट को विपक्ष द्वारा भाजपा सरकार की सोची समझी साजिश बताया जा रहा है, इसी विकल्प पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार से आपत्ति जताई थी। मतलब अब यह नहीं पूछा जाएगा कि वर्ष 2003 में आपके मां–बाप वोटर थे अथवा नहीं। अगर वोटर थे तो उनकी समस्त जानकारी फार्म–6 में दर्ज करनी होती थी।
समझये अब तक देश के लगभग अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) या तो पूरा किया जा चुका है या विभिन्न चरणों में चलाया गया है। और बिहार पश्चिम बंगाल में तो (SIR) पूरा कर चुनाव भी कराया गया है और सरकार भी बन गई वो भी भाजपा की,यानी जिन लोगो के (SIR) में वोटर लिस्ट से नाम कटे अब उनका क्या अब तो वहा सरकार भी बन चुकी,भारत निर्वाचन आयोग इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इण्डिया की बड़ी अपडेट के बाद अब सेकड़ो सवाल खड़े हो गए जिनमे पहला सवाल यह है कि क्या यूपी में भाजपा कटे हुए नाम वापस जोड़ेगी।



