नानौता सहारनपुर । उत्तर प्रदेश में सरकारी एंबुलेंस सेवा का उपयोग मुख्य रूप से आपातकालीन चिकित्सा सहायता, गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा, और मरीजों को मुफ्त व त्वरित इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने के लिए किया जाता है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मुख्य एंबुलेंस सेवाओं का उपयोग निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए किया जाता जैसे सड़क दुर्घटनाएं व ट्रॉमा किसी भी एक्सीडेंट या चोट लगने पर घायल को अस्पताल पहुंचाने के लिए गंभीर बीमारियां दिल का दौरा (Heart Attack), सांस लेने में तकलीफ या स्ट्रोक आने पर। अन्य आपात स्थिति आग से जलने, सांप के काटने या अचानक गंभीर रूप से बीमार होने पर एम्बुलेंस सेवा का लाभ लिया जाता है।
लेकिन इन सविधाओं को पाने के लिए आपको अपनी जिन्दगी को दांव पर लगाना होगा या तो पैसा खर्च कर आप अपनी प्राईवेट एम्बुलेंस का इस्तेमाल करें अन्यथा आपकी किस्मत पर निर्भर करता है कि आप एम्बुलेंस आने तक जीवित रहे या एम्बुलेंस आपको सही समय हाई सेन्टर ले जाये या नही क्योंकि यह सरकारी व्यवस्था है देर सवेर हो सकती है,और ध्यान रहे एम्बुलेंस अगर दो घण्टे बाद भी आये तो इस व्यवस्था का ढोल न पीटें जिस से सरकार की एम्बुलेंस सेवा की छवि खराब न हो।
ऐसा ही एक मामला मंगलवार की शाम समय करीब 5 बजकर 50 मिनट पर नानौता थाना अंतर्गत ग्राम हिमामपुर से सामने आया है जहां दो सगी बहाने रीता व रूपा पुत्री जगदीश सडक क्रोस करते समय तेज़ रफ़्तार कार पिकअप की चपेट में आ गई दोनों को करीब 6 बजकर 5 मिनट पर सीएचसी रिक्शा के माध्यम से लाया गया दोनों को हाई सेन्टर रेफर किया गया यहीं से यूपी एम्बुलेंस सेवा की सेवा शुरू होती है और बीती रात 7 बजकर 55 मिनट पर जिला अस्पताल से नानौता सीएचसी एम्बुलेंस पहुंच पाई,वो भी मुख्य चिकित्सा अधिकारी को मामले से अगवत कराने के बाद। अप अप सोच समझ सकते है कि एम्बुलेंस का ढोल पीटने वाली सरकार की एम्बुलेंस की कितनी फ़ास्ट सर्विस है।



