सहारनपुर। 5 सितम्बर की सुबह कलक्ट्रेट परिसर के अंदर मौजूद 70 साल से भी ज्यादा पुरानी मस्जिद को जिला प्रसाशन ने रविवार की सुबह बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया है,न्यायालय मस्जिद पक्ष की अपील को ख़ारिज कर सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को सुरक्षित रखा,शनिवार की शाम जिला प्रसाशन ने मस्जिद को ध्वस्त करने की तैयारी शुरू कर दी थी,लोगो में इस बात की चर्चा होने लगी की मस्जिद पर बुलडोजर चलेगा,मस्जिद के आस पास भीड़ जमा न हो इसके लिए जिला प्रसाशन की तरफ से ऐलान कहा गया ध्वस्तीकरण नही किया जा रहा मस्जिद सील की जा रही है,इसी को लेकर सपा विधायको द्वारा बाकायदा वीडियो बनाकर पोस्ट किया कि लोग अफ्वाओ पर ध्यान न दे कोई बुलडोजर कार्यवाही नही की जा रही।
लेकिन रविवार की सुबह जिला प्रसाशन ने मस्जिद पर बुलडोजर चलाया और नेताओ को हाउस अरेस्ट किया,इस पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद,सपा सांसद इकरा हसन ने बयान जारी करते हुए कहा सरकार एक धर्म विशेष को टारगेट कर मस्जिदों पर बुलडोजर चला रही है भाजपा सरकार इस बार सत्ता से जा रही है वह अपनी कुर्शी बचाने के लिए वोटो का धुरविक्र्ण कर फिर से सत्ता में बने रहना चाहती है,इमरान मसूद ने बयान देते हुए कहा कार्यवाही बिलकुल गलत तरीके से की गई है, कलक्ट्रेट परिसर भूमि आज भी याकूब और वाहिद खान के नाम है,सरकार खुद कलक्ट्रेट परिसर की मालिक नही है फिर उन्होंने कैसे कार्यवाही की,पहले सरकार अपना मालिकाना हक साबित करे।इस लिए आदेश भी और कार्यवाही भी दोनों असंवैधानिक है।
में कलक्ट्रेट परिसर के अंदर मौजूद 70 साल से भी ज्यादा पुरानी मस्जिद के निर्माण को जिला प्रशासन ने अवैध माना है। ऐसा कहा जाता है कि अंग्रेजों ने कलक्ट्रेट के काम करने वाले मुस्लिम कर्मचारियों के लिए यह मस्जिद बनवाई थी। उस वक्त उन्हें नमाज पढ़ने दूर जाना पड़ता था। कलक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद आज सुबह 5 बजे ढहा दी गई। शनिवार की रात भी इसे तोड़ने की सूचनाएं फैली तो DM ने भीड़ को ऐसा कहकर शांत किया कि मस्जिद सिर्फ सील की जाएगी। रविवार की सुबह लोग नींद से उठे तो मस्जिद जमींदोज हो चुकी थी। 16 जुलाई को जिला प्रशासन ने इस मस्जिद का निर्माण अवैध माना था। मस्जिद कमेटी ने कोर्ट में 1 जनवरी 1911 का बिजली बिल दिखाकर बताया कि कलक्ट्रेट से पहले ही यहां मस्जिद बन गई थी। जबकि प्रशासन ने सबूत रखा कि सहारनपुर में पहली बार बिजली ही 1912 में आई थी।
मुस्लिम समाज यूपी सरकार के फैसले से नाराज़ है,वह आंखे खोल कर सरकार की सभी करनी कथनी देख रहा है,आज मुल्क को जिस तरीके से दो कानून से चलाया जा रहा है उस पर मौजूद बुजुर्ग लोगो का कहना है कि यह दिन देखने के लिए हम सबने मिलकर देश आजाद कराया था क्या,मुस्लिम समाज ने देश आजाद कराने में अपनी गर्दने कटाई,बंटवारे में हमने अपना देश चुना अलग देश नही लिया,जिन्हें चाहिए था वो चले गए,अज देश में मुस्लिम समाज के नाम पर नफरत फेलाकर सरकार चलाई जा रही चुनाव जीते जा रहे,देश की जनता का ध्यान मुद्दों से हटाकर हिन्दू मुस्लिम नफरत में लगाया जा रहा है,फिर भी देश का मुसलमान संविधान का सम्मान करता है करता रहेगा,मुस्लिम उस समय भी देश के लिए क़ुरबानी देने में आगे था आज भी लेकिन मुसलामन देश में अशांति नही चाहेगा देश में शांति ही चाहेगा ।



