सहारनपुर। कलक्ट्रेट परिसर में जिस तरीके से मस्जिद को ध्वस्तीकरण करने का काम किया गया,उस कार्यवाही पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने खुलकर बयानबाजी करते हुए कहा जनपद में ये तो दंगा कराना चाहते थे,लेकिन सहारनपुर के आपसी भाईचारे समझदारी ने इन के मनसूबो पर पानी फेर दिया,ये सम्भल की तरह दंगा कराना चाहते थे लेकिन सहारनपुर के लोग नफरत के खिलाफ है यहां आपसी भाईचारा मजबूत है।
सहारनपुर मस्जिद के बाद आब मेरठ की शाही जामा मस्जिद पर जाँच की मांग की गई है,उतराखंड में लगातार मदरसों पर कार्यवाही की जा रही है,जानकारों के मुताबिक यह कार्यवाही मदरसों मस्जिदों के जमीन के दस्तावेज न होने के कारण है,सालो पहले सन 1900 के बाद सन 2010 तक जमीन खरीदी और मस्जिद मदरसा बना लिया उस समय बैनामा न कराना आज कार्यवाही का सबब है,भारत में करोड़ो घर आज भी ऐसे है जिनके पास बैनामा नही क्या वह सब अवेध है,सम्भल में मस्जिद को लेकर दंगा हुआ और अब भी वहा मस्जिदों को लेकर विवाद बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश में वर्तमान में ज्ञानवापी मस्जिद (वाराणसी),शाही ईदगाह मस्जिद (मथुरा),और शाही जामा मस्जिद (संभल) सहित कई प्रमुख धार्मिक स्थलों और मस्जिदों को लेकर कानूनी और अदालती विवाद चल रहे हैं। मुरादाबाद के पाकबड़ा इलाके में दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर बनी मुस्तफा मस्जिद को अवैध निर्माण और सरकारी जमीन पर बने होने के आरोप में मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) द्वारा नोटिस दिए जाने का विवाद है।
उत्तर प्रदेश में UMEED Portal पर दस्तावेजों की कमी और रिकॉर्ड में गड़बड़ी के कारण 31,000 से अधिक वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण रद्द या अस्वीकार किए गए हैं, जिसमें मस्जिदें भी शामिल हैं। हालांकि, प्रशासन या वक्फ बोर्ड द्वारा केवल मस्जिदों की अलग से कोई विशेष या सटीक संख्या अलग से जारी नहीं की गई है। अब चर्चा है कि एक के बाद एक मस्जिदों को नोटिस दिया जायेगा और इस कार्यवाही से एक खास समुदाय को परेशान किया जायेगा जिसका फायदा चुनाव में होगा,कई पत्रकारों ने तो सूत्रों का हवाला देकर सोसल मिडिया पर लिखा इस बार का चुनाव यूपी में सीधे सीधे हिन्दू मुस्लिम पर हो सकता है।



